रविवार, 29 मार्च 2009

अपमान की क्लांति से बचना - Open Source तकनीक

चिट्ठों पर यदा-कदा कुछ ऐसा पढ़ने में आता है, जिससे लगता है कि हास्य व्यंग्य कभी-कभी आक्षेप व अपमान का रूप ले लेता है| सम्प्रति ऐसा ही कुछ पढ़ा । यही नहीँ प्रतिदिन की आपसी बातचीत में भी हम को भी यदा कदा ऐसा लगता है कि किसी ने कुछ कटु कह कर हमारा अपमान कर दिया है।

ज्ञान जी अक्सर आत्मविकास के लिये, अलग अलग गुणों के विकास के लिये पशुओं से प्रेरणा लेते ही है, जैसे खच्चर से कर्म, बगुले से ध्यान, ऊंट से कोई अन्य गुण आदि। इसी प्रकार अपमान व ईगो-हर्ट से निजात पाने के लिये हमने विद्युतीय अभियंत्रण से प्रेरणा ले ली - यह जुगाड़ अक्सर कारगर साबित होता है, कभी हम ही दोषी होते हैं।

आकाशीय तड़ित् व बिजली का झटका
आकाशीय बिजली (तड़ित) यदि कहीं गिरती है तो काफ़ी नुकसान करती है। उसका विद्युतीय आवेश बहुत कुछ तहस नहस करता है। इसी प्रकार विद्युतीय चालक (live electric body or conductor) के सम्पर्क से हमें इसका करारा झटका लगता है।
हम आकाशी बिजली अथवा इलेक्ट्रिक शॉक से बचने के लिये इस विद्युत को सुगम मार्ग प्रदान करते हैं। उच्च भवनों में एक विद्युतीय चालक के द्वारा इसे भूमि से जोड़ देते हैं, व ऐसे ही घरों की वायरिंग में अर्थ (Electrical Earth) का इंतज़ाम करते हैं, ऐसे तार से जो कि भूमि से भली भांति जुड़ा हो।
भूमि को विद्युत आवेश का सिंक ( अवशोषक) भी मानते हैं। किसी प्रकार के हानिकारक आवेश को भूमि के अन्दर समाने का सुगम मार्ग बना कर हम इससे बच जाते हैं। तड़ित्-चालक अथवा इलेक्ट्रिक अर्थ के माध्यम से हानिकारक विद्युतीय आवेश हानिकारक ऊर्जावान होते हुए भी सुगम मार्ग से होता हुआ धरा में अवशोषित हो जाता है और हानि नहीँ पहुंचाता।

अपमान को अर्थ (Earth) करने की व्यवस्था
हमने भी इसी तकनीक को अपमान, ठेस आदि से बचने का तरीका माना है (बहुधा कामयाब रहता है) - बस मानसिक कण्डक्टर से अपमान को अर्थ (earth) कर देंते हैं, अपने पास आने नहीं देते। धरणी ऐसे अपमान का आवेश आसानी से अवशोषित कर लेती है और हम बच जाते हैं उसके हानिकारक प्रभाव से !

यह मुक्त स्रोत (Open Source) तकनीक शायद दंभ, क्रोध आदि में भी कारगर हो - पर बहुत अभ्यास और निपुणता लगेगी, हमें तो अभी। अभी ठीक से क्रोध करने की क्षमता तो अर्जित करें - मौज इसको विकसित जो नहीं होने देती!

इसी क्रम में एक और तकनीक और भी आगे सहेजने का प्रयास होगा।


3 टिप्‍पणियां:

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

विचारणीय प्रेरक बहुत बढ़िया पोस्ट. आभार.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | G.D.Pandey ने कहा…

अर्थिंग दमदार हो - और वह पूरे जतन से बनानी चाहिये अपने इक्विपमेण्ट्स बचाने को; तो अपमान के साथ साथ क्रोध, लोभ, ईर्ष्या नैराश्य आदि की भी अर्थिंग की जा सकती है।
एक दमदार पुस्तक बन सकती है - सफल अर्थिंग सिस्टम बनाने के कारगर नुस्खे!

अनूप शुक्ल ने कहा…

जय हो, जय हो। अब दिखाई दिया तड़ित चालक! क्या क्य़ूट पोस्ट है जी!