शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2007

सुरभित सन्देश (ख़ुशबू तुम्हारे ख़त में.)...

सुरभि और सन्देश, ख़त और ख़ुशबू... ये कोई शायर की शायरी अथवा कवि की कविता नहीं है, अब ये पंक्तियाँ मात्र कल्पना न हो कर वास्तविकता हो सकती है, और इसका श्रेय जाता है भारतीय डाक-तार विभाग को।

कुछ माह पहले समाचार पढ़ा कि भारतीय डाक तार विभाग ने सुगन्धित डाक-टिकटोँ को जारी करने का निर्णय लिया है। कभी मैं भी, कई अन्य किशोर युवकोँ की तरह, डाक-टिकट और विशेष रूप से प्रथम दिवस आवरण संग्रह किया करता था और कभी सुगन्धि-विज्ञान में भी कुछ रुचि थी तो यह समाचार जानकर मेरी डाक-टिकट संग्रह की उत्कंठा पुन: जाग उठी और सोचा कि आखिर इस विशेष प्रकार के सुगन्धित टिकट को संग्रहीत किया जाय।

प्रथम प्रयास - चन्दन की सुगन्ध युक्त डाक-टिकट

Indian Postal Stamp with Sandalwood Fragrance
चन्दन की सुगन्ध युक्त डाक-टिकट
दिसम्बर 13, 2006 को भारतीय डाक तार विभाग ने चंदन की लकड़ी के मिश्रण से बने कागज़ पर (एक विभागीय अधिकारी के अनुसार) सुगन्धित स्मृति डाक टिकट जारी किया। इस टिकट की लगभग 8 लाख प्रतियाँ मुद्रित करी गयीँ। यह 15 रुपये मूल्य का एक टिकट है।

विवरणिका
यह टिकट भारत में जारी होने वाला पहला सुगन्धित डाक-टिकट था। सरकार द्वारा किया गया यह प्रयोग सफ़ल रहा। भारतीय डाक-टिकट संग्रहकर्त्ताओँ में इस डाक-टिकट को असाधारण रूप लोकप्रियता मिली और शीघ्र ही इसकी लगभग सभी प्रतियाँ बिक गयीँ। मैंने भी इस टिकट को संग्रहीत किया है। डाक विभाग की मानें तो इस टिकट में एक वर्ष तक यह सुगन्ध बनी रहेगी और कभी भी इस डाक-टिकट की मुद्रित सतह को हल्का सा रगड़ने पर इसमें से चंदन की सुगन्ध आयेगी। (फिलहाल मैंने तो इसे रगड़ा नहीं है और वास्तव में इससे चंदन की मादक सुगन्ध आती है)। इस टिकट पर चंदन की लकड़ी में नक्काशी गयी एक कलाकृति की छवि अंकित है और इसका शीर्षक है - चंदन (Sandalwood)| टिकट के साथ विस्तृत जानकारी के लिये विवरणिका और प्रथम दिवस आवरण भी जारी किया गया।

इसके पूर्व ऐसे सुगन्धित डाक-टिकट को जारी करने वाले मात्र कुछ ही देश थे - थाईलैण्ड, स्विट्ज़रलैण्ड और न्यूज़ीलैंड। इस टिकट के जारी होने के बाद भारत भी इन चुनिन्दा देशों की श्रेणी में आ गया है।

इसकी लोकप्रियता को देख कर भारतीय डाक तार विभाग बहुत प्रोत्साहित हुआ और यह भी समाचार मिला कि शीघ्र ही विभाग ऐसे अन्य सुगन्धित डाक-टिकटों को जारी करेगा। भारतीय डाक तार विभाग ने आज-कल के बाज़ार और ग्राहक की पसंद पहिचान ली थी। वैसे ही ई-मेल व कोरियर सेवाओं द्वारा छीने गये बाज़ार के अंश से पीड़ित डाक विभाग, व्यावसायिकता के इस दौर में लोकप्रियता और लाभ के अवसर को खोना नहीं चाहता था।

ग़ुलाबों की सुगन्ध युक्त डाक-टिकट
अब वसंत ऋतु का समय हो, वैलेंटाइन दिवस नज़दीक हो, तो इससे अच्छा प्रतीकात्मक अवसर और क्या हो सकता था। भारतीय डाक तार विभाग ने फरवरी 7, 2007 को ग़ुलाबों की सुगन्ध वाले डाक टिकटों का सेट जारी करने का समाचार दिया। इस अवसर को और भी लोकप्रिय बनाने के लिये डाक विभाग ने भारतीय फिल्म उद्योग का भी सहयोग लिया। खूबसूरत और लोकप्रिय फिल्म अभिनेत्री प्रीटी ज़िंटा को इस विशिष्ट टिकट के लोकार्पण के लिये चुना गया। आखिर प्रीति और मित्रता के प्रतीक फूलों का प्रतिनिधित्व करना था, वह भी कोई और नहीँ, फूलों में सर्वोपरि गुलाब का!
प्रथम दिवस आवरण

Indian postage stamp with rose fragrance
महक ग़ुलाबोँ की
मिनिएचर सेट
मैंने भी अपना संग्रह जारी रखते हुए इस विशिष्ट और ग़ुलाब की सुगन्ध वाले भारतीय डाक-टिकट को खरीदा। यह एक "मिनिएचर-सेट" के रूप में चार टिकटों का समूह है। इन चार टिकटों मे ग़ुलाब के फूलों की चार भिन्न प्रजातियोँ के चित्र, उनके नाम के साथ मुद्रित हैं। इन टिकटों की भी मांग अधिक रही और ये भी सीमित मात्रा में उपलब्ध थे। इनमें से प्रत्येक टिकट 8 लाख प्रतियों में मुद्रित किया गया है। इन टिकटों पर मुद्रित ग़ुलाब के फूलों की प्रजतियाँ हैं - भीम(रु.5), दिल्ली प्रिंसेस(रु.15), जवाहर(रु.15) और नीलम(रु.5)। इस स्मृति डाक टिकट के समूह का नाम है - महक ग़ुलाबोँ की (Fragrance of Roses)। इसके साथ भी जारी किये गये प्रथम दिवस आवरण और विवरणिका। और हाँ ये डाक-टिकट भी ग़ुलाब के फूलों की मनमोहक छवि के साथ-साथ ग़ुलाब की मधुर सुगन्ध से युक्त हैं।

तो अब यदि आप किसी परिजन अथवा विशिष्ट मित्र को प्रीति और मित्रता की भावनाओं और मधुर-मादक सुरभि के साथ अपने सन्देश को प्रेषित करना चाहते हैं तो भारतीय डाक विभाग के इन अनूठे टिकटों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त यदि आप डाक विभाग द्वारा कोई पत्र पाते हैं और उसमें चंदन अथवा फूलों की सुगन्ध हो तो आश्चर्य न करें, बस उसमें लगे टिकटों पर ज़रा ध्यान दें (यदि उसमें टिकट तब तक सुरक्षित लगे हों तो, अन्यथा स्वयं समझ लें कि मामला क्या है!)

(कदाचित डाक-टिकटों की छवि के प्रकाशन का सर्वाधिकार, कापीराईट एक्ट के अनुसार डाक-तार विभाग के पास सुरक्षित होता है, इस विवशता से यहाँ टिकटों की मूल आकार छवि को नहीँ प्रकाशित किया गया है।)

4 टिप्‍पणियां:

संजय बेंगाणी ने कहा…

मेरे पास भी अपना डाक टिकिट संग्रह है, पर अब उसे बढ़ाना छुट गया है.

सुगन्धित टिकिटों के बारे में जान कर अच्छा लगा.

Divine India ने कहा…

मैने कोशिश की थी डाक टिकट संग्रह करने की पर मैं Numismatic or Wine Collection की ओर निकल गया…सुगंधित टिकटों के बारे में जानकर अनजाने सुगंधि का आनंद भी ले रहा हूँ>>

Shrish ने कहा…

पूरे एक महीने बाद दूसरी पोस्ट लिखी लेकिन अच्छी और जानकारी पूर्ण।

राजीव ने कहा…

संजय, दिव्याभ एवं श्रीष जी,

यह जानकर हर्ष हुआ कि आप किसी को भी मेरा आलेख रोचक, सूचनापरक अथवा अन्य किसी प्रकार से उपयुक्त लगा।